Bihar Board 10th VVI Subject Question 2026: 17 फरवरी 2026 को 100% Question यहीं से आएगा @govbiharboard.com

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Bihar Board 10th VVI Subject Question 2026: 17 फरवरी 2026 को 100% Question यहीं से आएगा @govbiharboard.com

Bihar Board 10th VVI Subject Question 2026:

1. विष के दाँत कहानी का नायक कौन है? तर्क पूर्ण उत्तर दें।

उत्तर- हमारी नजर में विष के दाँत कहानी का नायक मदन है। चुकि लेखक का कहना है कि जो बुराई का अंत करता है उसे ही नायक माना जाता है। मदन जब लहू नचा रहा था। उसी दौरान खोखा आकर कहता है की लट्टू हम भी खेलेंगे। जब उसे मदन के द्वारा मना कर दिया जाता है तो दो चार घुसा मदन को जमा देता है। उसके बाद मदन ने भी कासू के दो दॉत तोड़ डाले। मदन एक ईमानदार और स्वाभीमानी बालक था। अतः कहानी का नायक मदन ही होना चाहिए।

2. सेन साहब के परिवार में बच्चो के लालन पालन में किए जा रहे है लिंग आधारित भेद-भाव का अपने शब्दो में वर्णन करे ।

उत्तर – सेन साहब के परिवार में बच्चो के लालन पालन में जो लिंग आधारित भेद-भाव है वो सचमुच ही एक कठोर अन्याय है। सेन साहब अपने बेटियों को शिक्षा देना उचित नहीं समझते तथा बेटियों को खुलकर हँसने की भी इजाजत नहीं है। और बेटा में नटखटापन के रुप को इंजिनियरिंग का स्वरुप देखता है जो आधुनिक समाज के लिए उत्तम नहीं है।

3. मदन और कासू के बीच झगड़ें का कारण क्या था। इस प्रसंग के द्वारा नलिन विलोचन शर्मा क्या दिखाना चाहते है।

उत्तर – लेखक नलिन विलोचन शर्मा का कहना है कि मदन और कासू के बीच झगडे का मूल कारण लहू का खेल है। क्योंकि मदन को जब ड्राइवर के द्वारा गाड़ी नहीं छुने दिया गया तथा उसे धकेल दिया गया। इस बात को लेकर मदन ने भी काशु को लहू खेलाने से इंकार कर दिया जिससे कासू और मदन के बीच झगड़ा होने लगा।
इस प्रसंग के माध्यम से लेखक बताना चाहते है कि बालक नादान होता है वो अमीर और गरीब को नहीं देखता और वह अपमान सहन नहीं करता।

4. समस्त भूमंडल में सर्वविद सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपुर्ण देश भारत है। मैक्समुलर ने ऐसा क्यों कहा है ?

उत्तर -समस्त भूमंडल में सर्वविद सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपुर्ण देश भारत है, मैक्समुलर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि भारत ही एक मात्र ऐसा देश है, जहाँ जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं के ऐसे सामाधान ढूंढ निकाले गये हैं जो विश्व के दार्शनिकों के लिए चिन्तन का विषय है। यहाँ जीवन को सुखद बनाने के लिए उपयुक्त ज्ञान एवं वातावरण आसानी से मिल जाता है जो पुरे पृथ्वी में कही नही मिलता। भारत एक ऐसा देश है जहाँ भू-तल पर ही स्वर्ग की छटा निखर रही है।

5. लेखक मैक्समुलर की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों ?

उत्तर -लेखक मैक्समुलर की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन भारत के गाँवों में हो सकते हैं। क्योंकि भारतीय ग्रामीण संस्कृति में सच्चा भारत निहित है। भारतीय ग्रामीण लोगों में सच्चाई, प्रेम, करूणा, सहयोग की भावना कूट-कूट कर भरा होता है। जबकी शहरों में ऐसा नही होता है, गाँवों के अपेक्षा शहर ज्यादा प्रदूषित होते है। और शहरों में लोग सिर्फ अपने से मतलब रखते है, शहरी लोगों में सहयोग की भावना नही होते है। अतः लेखक का कहना बिलकुल उचित है।

6. भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता किनके लिए वांछनीय है और क्यों?

उत्तर -भारत को पहचान सकनेवाली दृष्टि की आवश्यकता यूरोपियन लोगों के लिए वांछनीय है, क्योंकि भारत ऐसी अनेक समस्याओं से भरपूर है जिनका समाधान होने पर यूरोपियन लोगों की अनेक समस्याओं का निदान संभव है। यहाँ जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं के ऐसे सामाधान ढूंढ निकाले गये हैं जो विश्व के लोगों के लिए चिन्तन का विषय है।

7. ‘बेदातियों का भी वेदांती’ किसे कहा गया है और किसने कहा है?

उत्तर – वेदांतियों का भी वेदांती’ फ्रेड्रिक मैक्समूलर को कहा गया है। यह उपाधि उन्हें भारतीय दर्शन और वेदांत साहित्य के प्रति उनके गहन ज्ञान, आदर और पश्चिमी दुनिया में इसके प्रचार के लिए दी गई थी। यह उपाधि स्वामी विवेकानंद ने दी थी।

8. लेखक मैक्समुलर ने नीति-कथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखाकिंत किया है ?

उत्तर- लेखक मैक्समुलर ने बताया कि नीति-कथाओं के अध्ययन-क्षेत्र में भी भारत के कारण ही नवजीवन का संचार हुआ है। क्योंकि भारत के कारण ही समय-समय पर अनेक नीति कथाएँ पूर्व से पश्चिम की ओर जाती रही हैं। यहाँ बड़ी-बड़ी बातों को एक छोटे से कहावत के रूप में समेट दिया जाता है। जैसे- “शेर के खाल में गधा” की कहावत । अतः हमे यह बात कहने में जरा भी संकोच नही है की नीति-कथाओं के अध्ययन-क्षेत्र में भारत के कारण ही नवजीवन का संचार हुआ है।

9. धर्मो की दृष्टी से भारत का क्या महत्व है ?

उत्तर -भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक विकास का केन्द्र रहा है। यहाँ धर्म के वास्तविक उद्भव, उसके प्राकृतिक विकास तथा उसके रूप का प्रत्यक्ष परिचय मिलता है। भारत वैदिक धर्म की भूमि है, बौद्ध धर्म की यह शरण-स्थली है। आज भी यहाँ नृत्य के नये मत मतान्तर प्रकट एवं विकसित होते रहते हैं। इस तरह से भारत धार्मिक क्षेत्र में भी विश्व को आलोकित करनेवाला एक महत्वपूर्ण देश है।

10. भारत किस तहर अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है ? स्पष्ट करें।

उत्तर -भारत अतीत और भविष्य को जोड़ता हैं। यहाँ मानवीय जीवन का प्राचीनतम ज्ञान विद्यमान है। यहाँ की भूमि प्राचीन इतिहास से जुड़ी रही है। यहाँ की संस्कृत भाषा के द्वारा विश्व को चिंतन का अवसर मिलता है जो अभी तक अज्ञात थी। आज की किसी भी समस्या से निपटने या किसी भी मसला को सिखने या सिखाने की बात क्यों न हो, भारत के रूप में ऐसी प्रयोगशाला मिलेगी जैसी विश्व में और कहीं नही मिल सकती । अतः भारत बीते हुए कल और आने वाले समय के लिए एक सेतु के रूप में मान्य है।

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11. मैक्समुलर ने नया सिकंदर किसे कहा है ? ऐसा कहना क्या उचित है? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट किजिए।

उत्तर – मैक्समुलर ने नया सिकंदर भारत आनेवाले नवागंतुक, अन्वेषकों, पर्यटकों एवं अधिकारियों को कहा है। और ऐसा कहना बिल्कुल उचित है क्योंकि लेखक कहते है की यदि आपलोग चाहें तो भारत के बारे में वैसे ही सुनहरे सपने देख सकते है और भारत पहुँचने के बाद एक से बढ़कर एक शानदार काम भी कर सकते है जैसे सर विलियम जोन्स ने कोलकात्ता पहुँचने के बाद इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक शानदार काम किये, उसी प्रकार आज भी भारतीयता को निकट से जानने के नवीन स्वप्रदशी को आज का सिकंदर कहना गलत नहीं है, यह उचित है।

12. भीम राव अम्बेदकर किस विडंबना कि बात करते है विडंबना का स्वरूप क्या है ?

उत्तर- भीम राव अम्बेदकर जिस विडंबना की बात करतें है वो है जातिवाद का पोषक । भारत में कई ऐसे गाँव है जहाँ के लोग शिक्षित होकर भी जात-पात, छुआ – छुत की भावना रखते है।
विडंबना का स्वरूप कार्य, कुशलता के आधार पर श्रम विभाजन होना चाहिए न कि जाति के आधार पर। चुकि श्रम विभाजन जाति प्रथा का दुसरा रूप है।

13. भीम राव अम्बेदकर के अनुसार आदर्श समाज में किस प्रकार की गतिशीलता होनी चाहिए? /

उत्तर -भीमराव अंबेडकर के अनुसार आदर्श समाज में समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व होना चाहिए। ऐसा समाज जहाँ किसी के साथ जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव न हो। सभी लोगों को समान अवसर मिलें और वे अपनी योग्यता के अनुसार आगे बढ़ सकें। समाज में सामाजिक न्याय और आपसी सम्मान की भावना बनी रहे – यही आदर्श समाज की सच्ची गतिशीलता होगी।

14. जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्को पर भीम राव अम्बेदकर की प्रमुख आपत्तियाँ क्या है ?

उत्तर -जातिवाद के पक्ष में डा० भीम राव अम्बेदकर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहते है कि काम का विभाजन जाति के आधार पर नही होना चाहिए। क्योंकि मानव का जिस जाति में जन्म होता है वह अपने माता-पिता के पेशे के अनुसार जीवन भर के लिए बँध जाता है, चाहे उसमें उसे रूचि हो या न हो और वह अपने देश और समाज का विकास नही कर पाता है

15. जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती ?

उत्तर -भारतीय समाज में जातिवाद के आधार पर श्रम विभाजन अस्वभाविक है क्योंकि जातिगत श्रम विभाजन श्रमको के रूची अथवा कार्य कुशलता के आधार पर नही होता बल्कि माता के गर्भ में ही श्रम विभाजन को तय कर दिया जाता है। जो विवशता, अरुचिपूर्ण होने के कारण गरीबी और बेराजगारी को बढ़ाने वाला होता है। जो विश्व के किसी भी समाज में नही पाया जाता है।

Bihar Board 10th VVI Subject Question 2026
Bihar Board 10th VVI Subject Question 2026

16. जातिप्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?

उत्तर- हम वास्तविक रूप से कह सकते है कि जातिप्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण माना जाता है चूँकि मानव का जिस जाति में जन्म होता है वह अपने माता-पिता के पेशे के अनुसार ही जीवन भर के लिए उसी पेशे में बँध जाता है। वह मन पसन्द कार्य करना चाहता है, परंतु नही कर पाता है जिससे अपने समाज और देश का विकास नही कर पाता। हिन्दु धर्म में जाति प्रथा के तहत पेशा बदलने की अनुमति नही दी जाती है।

17. भीम राव अम्बेदकर आज के उद्योगो में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या किसे मानते हैं और क्यों ?

उत्तर -भीम राव अम्बेदकर आज के उद्योगो में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या जाति-प्रथा को मानते है। क्योंकि जाति-प्रथा के कारण ही अपने रूची के अनुसार पेशा चुनने में आजादी नही होती है। जाति-प्रथा के आगे मनुष्य के भावना और रूची का कोई स्थान नही होता है। और मजबूरी में मनुष्य को अपना जातिगत पेशा वाला काम करना पड़ जाता है।

18. मदन हका-बक्का क्यों रह गया?

उत्तर – मदन हका-बक्का इसलिए रह गया क्योंकि उसने सोचा था कि सेन साहब के बेटे खोखा (काशू) के दो दाँत तोड़ने के कारण उसके पिता गिरधर उसे बहुत पीटेंगे। लेकिन जब वह रात में घर लौटा, तो उसके पिता ने पीटने के बजाय, उसे लपककर हाथों में उठा लिया और प्यार से शाबाशी दी। पिता के चेहरे से नाराजगी का बादल हट गया था। अपने पिता का ऐसा अप्रत्याशित व्यवहार देखकर और उनसे इतना गर्व व प्यार पाकर मदन को विश्वास नहीं हुआ और वह हक्का-बका (आश्चर्यचकित) रह गया।

19. बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को क्या याद दिलाती है ?

उत्तर – बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को याद दिलाती है की प्राचीन काल में मनुष्य जंगली था। वह वनमानुष की तरह था। उस समय वह अपने नाखून की सहायता से जीवन की रक्षा करता था। दाँत होने के बावजूद नख ही उसके असली हथियार थे। उन दिनों अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ने के लिए नाखून ही आवश्यक अंग थें। बढ़ते नाखून द्वारा प्रकृति मनुष्य को याद दिलाती है कि तुम्हारे नाखून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही प्राचीनतम नख एवं दंत पर आश्रित रहने वाला जीव हो। पशु की समानता तुममें अब भी विद्यमान है।

20. लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहाँ तक संगत है?

उत्तर -कुछ लाख वर्षो पहले मनुष्य जब जंगली था। उसे नाखून की जरूरत थी। क्योंकि आत्मरक्षा एवं भोजन हेतु नख की महत्ता अधिक थी। उन दिनों प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ने के लिए नाखून आवश्यक अंग था। असल में वही उसके अस्त्र थे। अब मनुष्य समयानुसार अपने अस्त्र में भी परिवर्तन कर लिया है। अतः नाखून को प्राचीन समय के लिए अस्त्र कहा जाना उपयुक्त और तर्कसंगत है।

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21. मनुष्य बार-बार नाखूनों को क्यों काटता है ?

उत्तर – मनुष्य निरंतर सभ्य होने के लिए प्रयासरत रहा है। प्रारंभिक काल में मानव एवं पशु एकसमान थे। नाखून अस्त्र थे। लेकिन जैसे-जैसे मानवीय विकास तेज होती गई मनुष्य पशु से भित्र होता गया। उसके अस्त्र-शस्त्र, सभ्यता-संस्कृति में निरंतर नवीनता आती गयी। वह पुरानी जीवन-शैली को परिवर्तित करता गया। जो नाखून अस्त्र थे उसे अब सौंदर्य का रूप देने लगा। इसमें नयापन लाने, इसे संवारने एवं पशु से भित्र दिखने हेतु नाखूनों को मनुष्य काट देता है।

22. लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी ने किस प्रसंग में कहा है कि बंदरिया मनुष्य का आदर्श नही बन सकती ? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट करें।

उत्तर – प्रसंग – मैं ऐसा तो नहीं मानता कि जो कुछ हमारा पुराना है, जो कुछ हमारा विशेष है उससे हम चिपटे ही रहें । पुराने का मोह सब समय वांछनीय ही नहीं होता। मेरे बच्चे को गोद मे दबाये रखने वाली बंदरिया मनुष्य का आदर्श नही बन सकती। लेखक महोदय का अभिप्राय है कि सब पुराने अच्छे नहीं होते, सब नए खराब नही होते। भले लोग दोनों का जाँच कर लेते हैं, जो हितकर होता है उसे ग्रहण करते हैं।

23. देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएं लिखी जाती हैं ?

उत्तर -देवनागरी लिपी में हिन्दी, संस्कृत, नेपाली, नेवारी, मराठी, मैथिली, मगही, एवं भोजपुरी भाषाएं लिखी जाती है। जो भारत के सम्पुर्ण क्षेत्रों मे फैला हुआ है।

24. लेखक गुणाकर मुले ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।

उत्तर -लेखक गुणाकर मुले ने गुजराती और बंग्ला लिपि से देवनागरी का संबंध बताया है। तथा साथ ही दक्षिण भारत की ब्राह्मी लिपि और नंदिनागरी लिपि की तुलना देवनागरी लिपि से किये है।

25. उत्तर भारत के किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं ?

उत्तर- भारत में इस्लामी शासन की नींव डालनेवाले महमूद गजनवी के लाहौर के टकसाल में ढाले गए चाँदी के सिक्कों पर भी हम नागरी लिपि के शब्द देखते हैं। इसके आलावा मुहम्मद गोरी, अलाउदीन खिलजी, शेरशाह, अकबर आदि शासकों ने भी अपने सिक्कों पर नागरी लेख प्राप्त होते हैं।

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