Bihar Board 10th Sanskrit VVI Subjects Question 2026: 19 फरवरी 2026 VVI Subject 100% आएगा यहां से देखें। @govbiharboard.com

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Bihar Board 10th Sanskrit VVI Subjects Question 2026: 19 फरवरी 2026 VVI Subject 100% आएगा यहां से देखें। @govbiharboard.com

Bihar Board 10th Sanskrit VVI Subjects Question 2026:

1. आत्मा का स्वरूप क्या है?

उत्तर – मंगलम् पाठ के आधार पर महर्षि वेदव्यास के द्वारा कहा गया है, कि आत्मा सुक्ष्म से सुक्ष्म और महान से महान होता है, जो सभी जीव-जन्तुओं के हृदय रूपी गुफा में निवास करता है।

2. मंगलम् पाठ के आधार पर सत्य की विशेषताओं को लिखें?

उत्तर- मंगलम् पाठ के आधार पर महर्षि वेदव्यास कहते है, कि सत्य की जीत होती है, न कि असत्य की। सत्य से ही देवों का मार्ग विस्तार होता है। आप्तकामा जैसे ऋषि सत्य को बड़ा भण्डार समझते हैं।

3. नदी और विद्वान मे क्या समानता है?

उत्तर – जिस प्रकार से नदी अपने नाम और रूप को छोड़कर बहती हुई समुन्द्र में प्रवाहित हो जाती है। ठीक उसी प्रकार विद्वान पुरुष अपने नाम और रूप को छोड़कर ब्रह्मा में विलीन हो जाते है। इस प्रकार हम कह सकते हैं, कि नदी और विद्वान में समानता है।

4. मंगलम् पाठ में कौन-कौन उपनिषद् से मंत्र संकलित है?

उत्तर-मंगलम् माठ में ईशावस्योपनिषद् कठोपनिषद् मुण्डकोपनिषद एवं श्वेतश्वतरोपनिषद् से मंत्र संकलित है।

5. नदियाँ समुन्द्र में कैसे मिलती है?

उत्तर- जिस प्रकार से नदियाँ अपने नाम और रूप को छोड़कर बहती हुई समुन्द्र में मिल जाती है।

6. विद्वान ब्रह्म को कैसे प्राप्त करते हैं?

उत्तर – मुण्डकोपनिषद् में महर्षि वेदव्यास कहते हैं कि जिस प्रकार से विद्वान लोग अपने नाम और रूप को छोड़कर ब्रह्मा को प्राप्त करना चाहते हैं।

7. महान लोग संसार रूपी सागर को कैसे पार करते हैं?

उत्तर – संसार में सत्य की जीत होती है और ईश्वर की प्राप्ति सत्य से होती है। इसलिए महान लोग सत्य के मार्ग को चुनते हुए संसार रूपी सागर को पार कर जाते हैं।

8. विद्वान मृत्यु को कैसे पराजित करते हैं?

उत्तर – महान पुरुष अपने को अज्ञानी और दुसरे को ज्ञानी समझकर मृत्यु को पराजित कर देते है, क्योकिं वे जानते हैं कि इस संसार रूपी सागर को पार करने का कोई दूसरा मार्ग नही है।

9. मंगलम् पाठ की पाँच वाक्यों में परिचय दे?

उत्तर- मंगलम् पाठ के लेखक महर्षि वेदव्यास है। इस पाठ में पाँच मंत्र है। सभी मंत्र चार उपनिषद् से संकलित है। जैसे:- ईशावस्योपनिषद्, कठोपनिषद्, मुण्डकोपनिषद् एवं श्वेताश्वतरोपनिषद् और कुल उपनिषद् की संख्या 108 होती है।

10. लेखक “पाटलिपुत्र वैभवम्” पाठ से हमें क्या संदेश देना चाहते हैं?

उत्तर- लेखक का कहना है, कि प्राचीन काल में पाटलिपुत्र एक महान नगर था। जहाँ शिक्षा, वैभव और समृद्धि थी। मध्यकाल में पटना की स्थिती ठीक नही थी। मुगलकाल में इस नगर का पुनः उद्धार हुआ तथा अंग्रजों के शासन काल से लेकर वर्तमान में इस नगर का अत्यधिक विकास हो रहा है।

Bihar Board 10th Sanskrit VVI Subjects Question 2026
Bihar Board 10th Sanskrit VVI Subjects Question 2026

11. कौन-कौन से विदेशी यात्री पटना आये थे?

उत्तर- मेगास्थनीज, फाहृयान, ह्वेनसांग और इत्सिंग आदि विदेशी यात्री पटना आये थे।

12. किन-किन विदेशी यात्रियों ने अपने संस्मरण ग्रंथों में पटना का वर्णन किया है?

उत्तर -मेगास्थनीज, फाहृयान, ह्वेनसांग और इत्सिंग आदि यात्री ने अपने संसमरण ग्रंथों में पटना का वर्णन किया है।

13. कवि दामोदर गुप्त के अनुसार पटना कैसा नगर है?

उत्तर -कवि दामोदर गुप्त के अनुसार पटना की भूमि विद्वानों की शरणस्थली है और यह भूमि भगवान इन्द्र के स्वर्ग से भी सुन्दर है।

14. भगवान बुद्ध ने पटना के बारे में क्या कहा था?

उत्तर- भगवान बुद्ध ने पटना के बारे में यही कहा था कि यह गाँव एक दिन महानगर बनेगा। परन्तु आग, झगड़ा और बाढ़ से भयभीत होता रहेगा। आने वाले समय में यह नगर को पटना कहा जाने लगेगा।

15. मेगास्थनीज कौन था?

उत्तर -मेगास्थानीज युनान का राजदूत था। जो कि पटना नगर चन्द्रगुम्त मौर्य के शासन काल में आया था।

16. चन्द्रगुप्त मौर्य एवं अशोक के काल में पटना की रक्षा-व्यवस्था कैसी थी?

उत्तर -चन्द्रगुप्त मौर्य के काल में पटना की रक्षा-व्यवस्था एवं शोभा अत्यंत उत्कृष्ट थी। एवं अशोक के काल में पाटलिपुत्र की रक्षा-व्यवस्था अधिक मजबूत थी।

17. संस्कृत के ग्रंथ या पुराण में पटना के कौन-कौन नाम मिलते हैं?

उत्तर -संस्कृत के ग्रंथ या पुराण में पटना के नाम पुष्पपुर एवं कुसुमपुर मिलते हैं।

18. पटना के प्राचीन महोत्सवों का वर्णन करें?

उत्तर- पटना के प्राचीन महोत्सव गुप्तवंश के शासन काल में शरद् ऋतु का आगमन होने पर कौमुदी महोत्सव मनाया था। यह महोत्सव दुर्गा पुजा जैसा देखने में प्रतीत होता था। इस उत्सव में सभी नगरवासी आनंद मग्न हो गये थे।

19. राजशेखर ने पटना के सम्बन्ध में क्या लिखा है?, (अथवा), राजशेखर ने पटना का उल्लेख किस रूप मे किया है?

उत्तर राजशेखर नामक कवि ने काव्यमीमांसा काव्य की रचना किया। और इसमें कहा कि पटना में बड़े-बड़े कवि वैयाकरण भाष्यकर परीक्षित हुए। उन्होने कहा है, कि बहुत समय तक पाटलिपुत्र की प्राचीन सरस्वती परम्परा स्थित रही है।

20. प्राचीन काल में पाटलिपुत्र (पटना) को शिक्षा का केन्द्र कहा जाता है। क्यों?

उत्तर- प्राचीन पटना में पाणिनी, पतंजलि, पिंगल, वररूचि और याडि जैसे महर्षियों ज्ञान की प्राप्ति करके अपने-अपने क्षेत्रों में विद्वान हो गये। तो इस प्रकार हम कह सकते है, कि पटना को प्राचीन शिक्षा का केन्द्र कहा जाता है।

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21. पटना को सरस्वती कुल निवास/गृह कहा जाता है। क्यों?

उत्तर -पटना में पाणिनी, पतंजलि, पिंगल, वररूचि और याडि जैसे महर्षियो की जन्म भूमि रही है। इसलिए इस भूमि को सरस्वती का वंशज कहा जाता है। और यह सरस्वती परम्परा चलते आ रही है। इसलिए इस भूमि को सरस्वती कुल निवास कहा जाता है।

22. पटना के पुख्य दर्शनीय स्थनलो का नामोल्लेख करें ?

उत्तर- पटना मे महावीर मंदिर, चिडियाघर, तारामंडलल, गोलगृहम सचिवालय, संग्राहलय, उच्च न्यायालय और मौर्य कालिक इत्यादि दर्शनीय स्थान है।

23. वीरेश्वर का स्वभाव कैसा था?

उत्तर- मिथिला के महामंत्री वीरेश्वर थे। उनका स्वभाव कारूणिक एवं दयावान था। वह आलसियो एवं अनाथो को भोजन एवं वस्त्र दिया करते थे।

24. विधापति कौन थे ?

उत्तर -विधापति अलसकथा के कहानीकार थे। वे मैथिली भाषा के कवि थे। उनके द्वारा हिन्दी और संस्कृत में कई ग्रंथो की रचना किया गया था।

25. आलस शाला में आग लगने पर आलसी को किसने और क्यो निकाला ?

उत्तर -आलस शाला मे आग लगने पर सभी धूर्त्त लोग पलायन (भाग गये) थे। चारो आलसी सोये हुए बात कर रहे थे। आलस शाला मे फैली आग को देखकर नियोगी पुरुष ने चारो आलसियों को केश पकड़कर खीचते हुए बाहर निकाला।

26. आलसशाला में कर्मचारियो ने आलसियो को परीक्षा कैसे ली?

उत्तर -आलसशाला में बहुत सारे धूर्त बनावट आलस ग्रहण कर भोजन और वस्त्र प्राप्त करने लगे। जिससे आलसशाला का खर्च बढ़ गया। अधिक खर्च को देखकर कहाँ के कर्मचारियो ने आलसशाला में आग लगाकर परीक्षा ली।

27. आलसशाला मे कर्मचारियो ने आलसियो की परीक्षा कैसे ली।

उत्तर -आलसशाला में आग लगने पर चार आलसी पुरुष नही भागे। चारो आलसी पुरुष को बचाने के लिए महामंत्री वीरेश्वर के नियोगी पुरूषों ने केश पकड़कर आलसियों को आलसशाला से बाहर निकाला।

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