Bihar Board 12th Chemistry VVI Subject 2026: 7 फरवरी वायरल सब्जेक्टिव क्वेश्चन यहां से देखें जो Exam में आएगा। @govbiharboard.com
Bihar Board 12th Chemistry VVI Subject 2026:
(1) द्विनिषेचन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर:- पराग नलिका में उपस्थित दोनो नर केन्द्रक, नर युग्मक की तरह कार्य करते है और भूणकोष मे पहुंचने के बाद इनमें से एक नर युग्मक वास्तविक मादा युग्मक (अण्ड कोशिका) के अन्दर प्रवेश करके केन्द्रक के साथ संलयित हो जाता है तथा दूसरा नर युग्मक, दो ध्रुवीय केन्द्रकों द्वारा बने द्वितीयक केन्द्रक की ओर पहुँचकर उसे निषेचित करता है। इस क्रिया को विसंलयन कहते है।
यहाँ पर एक ही भ्रूणकोष में दो संलयन होते है। और इस प्रक्रिया को द्विनिषेचन या दोहरा निषेचन कहते है।
(2) असंगजनन क्या है? इसका क्या महत्व है?
उत्तर:- कुछ पौधे ऐसे होते है जिनमें बिना अर्थसूत्री विभाजन के ही नये पौधे का निर्माण होता है। अर्द्धसूत्री विभाजन की अनुपस्थिति में नये पौषधे के निर्माण की इस प्रक्रिया को असंगजनन कहते है। असंगजनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है।
(ⅰ) कायिक जनन :- इस प्रकार के प्रजनन मे बीज नाही बनता है। किसी कलिका से नये पौधे का जन्म होता है।
जैसे- आलू, गन्ना, हल्दी आदि।
(ii) अनिषेकबीजता :- इस प्रकार का प्रजनन बीज द्वारा होता है। लेकिन बीज के बनने में संयुग्मन एवं अध्द सूत्री विभाजन नहीं होता है।
जैसे – मक्का, धतूरा आदि।
(3.) बहुभ्रूणता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर- प्रायः एक बीजाण्ड या बीज में एक ही भ्रूण होता है लेकिन जब एक बीजाण्ड या बीज में एक से अधिक भ्रूण उत्पन्न होते है तो इसे बहुभ्रूणता कहते है। अनावृतबीजी पौधो में यह घटना अधिक होती है लेकिन आवृतबीजी पौधों में यह काफी कम पायी जाती है। बहुभ्रूणता की खोज एण्टोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने सन्तरे में की थी।
(4) आवर्त चक्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर- मादाओं में अण्डाणु का निर्माण प्रत्येक 28 दिन के बाद होता इस चक्र को आवर्त चक्र या मासिक चक्र कहते है। प्रत्येक स्त्री मे यह चक्र 12-13 वर्ष मे प्रारम्भ हो जाता है तथा 45-55 वर्ष की आयु मे खतम हो जाता है। आवर्त चक्र का नियमन करने वाले दो प्रमुख हामोन्स LH व FSH है।
(5.) मनुष्य मे लिंग निर्धारण। पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर – मानव के प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़ी गुणसूल पाये जाते है। जिनमें से 22 जोड़ी गुणसूत्र कायिक गुणसूल होते जिनकी संख्या स्त्री व पुरुष मे समान होती है जबकि 1 जोड़ी गुणसूत लिंग गुणसून होता है। मादा का लिंग गुणसूल x x तथा नर का XY. होता है। इन्ही गुणसूत्रों के द्वारा मानव में लिंग का निर्धारण होता है।

शुक्राणु – (22+x.), (22+y) अण्डाणु – (22+x), (22+x)
(6) अपूर्ण प्रभाविता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर – दो विपरीत लक्षण वाले पौधे के बीच संकरण कराने पर जब एक लक्षण दूसरे पर पूर्ण रूप से प्रभावी न हो सके तो इस घटना को अपूर्ण प्रभाविता कहते है।
जैसे – मिराबिलिस जलापा
(7.) मानव जीनोम परियोजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर – मानव जीनोम एक बड़े स्तर की परियोजना है जिसके अन्तर्गत मनुष्य के जीनोम मे उपस्थित समस्त जीन की पहचान की जाती है। मानव जीनोम मे (3×10१) क्षार युग्म है तथा प्रति क्षार पहचानने के लिए 3 अमेरिकी डॉलर का खर्च आता इस परियोजना की प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 13 वर्ष का समय लगता है।
इसे व्यापकता के कारण महापरियोजना भी कहते है।
(8.) डी. एन. ए. फिंगर प्रिन्टिंग पर संक्षिप्त टिप्पाणी लिखिए।
उत्तर- डी. एन. ए. फिंगर प्रिंटिंग एक ऐसी तकनीक है जिसकी सहायता से विभिन्न व्यक्तियों अथवा जीव धारियों के DNA में भिन्नताओं को देखा जा सकता है। इस तकनीक को सर्वप्रथम अलेक जेफ्रे ने इंग्लैण्ड मे विकसित किया था।
डी.एन.ए. फिंगर प्रिन्ट विभिन्न ऊत्तको (बाल, खून, लार’, त्वचा, वीर्य, योनिद्रव आदि) से प्राप्त किये जा सकते है।
इसका उपयोग करके किसी खूनी, बलात्कारी, पैतृत्व के सम्बन्ध आदि की पहचान की जा सकती है।
(9.) टीकाकरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर – टीका निलम्बित कोशिकाओं, शुष्क सूक्ष्म जीवों या कोशिकाओं द्वारा उत्सर्जित एक उत्पाद होता है। जिसका उपयोग प्रतिरक्षा प्रदान करने हेतु किया जाता है। यह एन्टीजन का बोल होता है जिसे इन्जेक्शन द्वारा शरीर में प्रवेश कराळे प्रतिरक्षा प्रदान किया जाता है। इस प्रक्रिया को टीकाकरण कहते है।
सर्वप्रथम एडवर्ड जेनर नामक वैज्ञानिक ने चेचक के टीके की खोज की। इसीलिए इन्हे प्रतिरक्षा विज्ञान का जनक भी कहा जाता है।
(10.) स्टेम कोशिकाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर – स्टेम कोशिकाएँ या मूल कोशिकाएँ ऐसी कोशिकाएँ होती है जिनमें शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकानित करने की क्षमता होती है। इसके साथ ही ये अन्य किसी भी प्रकार क कोशिकाओं में बदल सकती है। इन कोशिकाओं को शरीर की किसी भी प्रकार की कोशिका की मरम्मत के लिए प्रयोग किया सकता है। इनके द्वारा हृदय रोग, बहरापन पन, रक्त कैंसर, त्वया निरोपण आदि का उपचार किया जा सकता है।
(11.) अमीबीय पेचिश पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर – अमीषीय पेचिश, एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका नामक प्रोटोजोआ के द्वारा होती है। यह आन्त्र मे विकर स्वावित करके धाप पैदा कर देता है। इन घावों से खत, म्यूकस, आदि मल के साथ पेचिश के रूप मे बाहर आता है।
यह रोग संक्रमित भोजन एवं जल द्वारा दूसरे व्यक्ति मे पहुंचता है। इसका सबसे बड़ा कारण घरेलू मक्खियों है। इस रोग के होने पर पेट मे दर्द, सिर में दर्द, वमन की इच्छा होती है। रोगी के आखों के पास काले धेरै बन जाते है तथा शरीर कमजोर में हो जाता है।
इस रोग से बचने का सबसे अच्छा उपाय व्यक्तिगत स्वच्छता व साफ-सुथरा भोजन का सेवन करना है।